ललितपुर का दक्षिण पश्चिम भाग बड़ा गौरवशाली है यहां विराजत शक्तिपीठ में बैठी मां चंडी काली है गुरुवर परमानंद प्रयासित हुए और पागल बाबा बीहड़ वन से मुक्त करके मडिया में मैया लबा सतत प्रयासों से स्वामी जी नित्यानंद हुए उदित कर पात्री जी के संग मिलकर सिद्धों में मैं जागी सिद्धत सनातनी सब भक्त जनों ने बनवाया छोटा मंदिर जिसमें महामंडलेश्वर धारी गुरु गोपेश्वर बैठे अंदर करते रहे बहुत दिन तक में माता रानी का बंदन अंत समय में चंदेश्वर गिरी माथे लगाया शुभ चंदन महामंडला धीश बन गए पीठ आदिश्वर चांदी ग्रह सृजनशीलता से परिसर में निर्मित हो गया मंगल ग्रह साथ-साथ में संत निवास व गौशाला की रचना हुई लोगों के भरपूर प्रयास से सकारात्मन मां कल्पना हुई मां अभिलाष स्वामी जी की व्रत रूप गौशाला हो गौ 
सेवा मे समर्पित जीवन की मृग छाला हो यह अन्नय का मुक्त हस्त सहयोग करें गोधन की रक्षा में अपने धन का सदुपयोग करें

