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ललितपुर नगर के दक्षिणी-पश्चिमी भूभाग नई बस्ती क्षेत्र में स्थित चण्डीमाता मन्दिर अतिप्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ है। स्वाधीनता से कई दशक पूर्व स्वामी श्री परमानन्द जी महाराज ने साधु श्री पागलवावा के साथ मिलकर देवी जी की मढ़िया को सघन झाड़ियों से मुक्त कराया। लम्बे अंतराल के बाद स्वामी श्री नित्यानंद जी महाराज ने स्वामी श्री करपात्री जी महाराज के मार्गदर्शन में सनातनी श्रद्धालुओं की आराध्य देवी चण्डी माता की मड़िया का जीर्णोद्धार कर लघु मन्दिर स्थापित किया। तत्पश्चात् महामण्डलेश्वर श्री गोपेश्वर गिरी जी महाराज माता रानी की सेवा दीर्घावधि तक करते रहे।

सन् 2007 में उनके गौलोक गमन के उपरांत महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 चण्डी पीठाधीश्वर श्री चन्देश्वर गिरी जी महाराज माता जी की सेवा में गद्दी पर विराजमान हुये महामण्डलेश्वर जी की सृजनात्मक विचारधारा के चलते मन्दिर परिसर में विशाल मंगल भवन का निर्माण हुआ जिसमें समय-समय पर धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक आयोजन होते रहते है। परिसर में ही साधु संतों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए संत निवास का निर्माण कराया गया साथ ही एक छोटी गौशाला का संचालन भी किया जा रहा है। चण्डी माता के विशाल मन्दिर की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए मन्दिर के आर्थिक संसाधनों से निर्माण कार्य शुरू हुआ। प्रकल्प की विशालला को देखते हुये निर्माण हेतु बृहद कोष की भी आवश्यकता है। नगर के श्रद्धालु भक्तों ने मुक्त हस्त होकर दान दिया है जिससे मन्दिर भवन का निर्माण शुरू हो चुका है।

शिलाखण्डों से निर्मित होने वाले मन्दिर भवन को शीघ्र पूर्ण करने हेतु आपकी स‌द्भावनाओं सहित समर्पण राशि की आवश्यकता है इस प्रकल्प की पूर्णता हेतु यथेष्ठ धनराशि का संग्रह करने हेतु हम आपसे अनुरोध करते हैं। आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मन्दिर निर्माण हेतु समर्पण राशि का सहयोग देकर पुण्य लाभ अर्जित करें।

वर्तमान श्री श्री 1008 चंडीपीठाधीश्वर आचार्य स्वामी चंद्रेशवर गिरी जी महाराज

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